ज्वैलर्स की हड़ताल खत्म, खुल गई दुकानें

नयी दिल्ली: देश के सर्राफा कारोबारियों ने अपनी 42 दिन से जारी हड़ताल अस्थायी रूप से वापस ले ली है. बजट में चांदी के अलावा और सभी तरह के गहनों पर 1 फीसदी की एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ देशभर के सर्राफा कारोबारी हड़ताल पर चले गए थे. इस 42 दिन की हड़ताल में जेम्स और ज्वैलरी इंडस्ट्री को 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. करीब 300 संगठनों के 3 लाख से अधिक सर्राफा कारोबारी 2 मार्च से हड़ताल पर थे।

ज्वैलर्स एसोसिएशन ने मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की थी और सरकार के आश्वासन कि उत्पाद शुल्क अधिकारी उन्हें किसी भी तरीके से परेशान नहीं करेंगे के बाद ज्वैलर्स ने 12 दिन के लिए अपनी हड़ताल वापस ले ली है. हालांकि ज्वैलर्स ने हड़ताल खत्म करने का फैसला कल यानी मंगलवार को ही ले लिया था लेकिन इसका औपचारिक ऐलान आज किया गया है.

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के उपाध्यक्ष सुरिंदर कुमार जैन ने कहा, ‘‘हमने सरकार के आश्वासन के बाद अस्थायी रूप से 24 अप्रैल तक अपनी हड़ताल वापस ले ली है.’’ महाराष्ट्र राज्य सर्राफा स्वर्णकार फेडरेशन के अध्यक्ष फतेहचंद रंका ने बताया कि महाराष्ट्र के ज्वैलर्स ने भी 24 अप्रैल तक अपनी हड़ताल वापस ले ली है. राजस्थान सर्राफा संघ, जयपुर के अध्यक्ष सुभाष मित्तल ने कहा कि राजस्थान के जौहरियों, कारोबारियों तथा कारीगरों ने कल से अपनी दुकानें खोल दी हैं.

बुलियन एंड ज्वेलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम अवतार वर्मा ने कहा कि यदि सरकार 1 फीसदी के उत्पाद शुल्क को वापस लेने की हमारी मांग को पूरा नहीं करती है, तो 25 अप्रैल से हम फिर हड़ताल पर चले जाएंगे. इस बीच, मेरठ के जौहरियों ने भी आज अपनी दुकानें खोल लीं.

सरकार ने जौहरियों की मांग पर विचार के लिए पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। समिति अपनी रिपोर्ट 60 दिन में सौंपेगी.

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