एक ऑफिशियल प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि इस मुद्दे पर आई खबरें ‘तथ्यों पर आधारित नहीं हैं’. इसमें कहा गया है कि सरकार कोहिनूर को सही और प्यार से वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करने के अपने वादे को दोहराती है. रिलीज़ में कहा गया है कि हालात यह है कि मामला इस समय कोर्ट में पेंडिंग है और जनहित याचिका को अभी स्वीकार किया जाना बाकी है . इसमें कहा गया है, . भारत के सोलिसिटर जनरल ने कोर्ट को हीरे के इतिहास के बारे में जानकारी दी. एएसआई के कराए गए लेक्चर के आधार पर एक बयान दिया था.’’ ‘‘ इसलिए यह दोहराया जाना चाहिए कि भारत सरकार ने अभी तक कोर्ट को अपने इरादे के बारे में सही ढ़ंग से जानकारी नहीं दी है.’’ रिलीज़ में यह भी कहा गया है कि कोर्ट ने सोलिसिटर जनरल की अपील पर छह हफ्तों का समय दिया ताकि वह इस मामले में अपना जवाब देने के लिए निर्देश ले सकें.
रिलीज़ में कहा गया है, ‘‘इसमें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के 1956 के विचारों को भी पेश किया है . पंडित नेहरू ने रिकार्ड में यह बात कही थी कि इस खजाने को वापस लाने का दावा करने का कोई आधार नहीं है . उन्होंने साथ ही यह भी कहा था कि कोहिनूर को वापस लाने के प्रयासों से मुकिश्लें पैदा होंगी.’’ रिलीज़ में कहा गया है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी कोशिशों से भारतीय इतिहास की तीन कलाकृतियां स्वदेश वापस आयी हैं जिनसे संबंधित देशों के साथ रिश्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ा है .