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एप्प्ल को एक और झटकाः साल 2013 के बाद हुआ कुछ ऐसा

एप्प्ल को एक और झटकाः साल 2013 के बाद हुआ कुछ ऐसा

नई दिल्लीः एप्पल कंपनी के लिए एक के बाद एक बुरी खबरों का दौर जारी है. पहले 13 सालों में पहली बार कंपनी की बिक्री घटने की खबर आई और कंपनी की आय में बढ़त का सिलसिला टूटा. वहीं अब एप्पल के लिए शेयर बाजार से बुरी खबर ये है कि साल 2013 के बाद ये हफ्ता एप्पल के लिए सबसे खराब साबित हुआ है. कंपनी के शेयर के टूटने के पीछे 2 अहम वजह रही. एक तो आइफोन की बिक्री में गिरावट और दूसरे एप्पल के बड़े निवेशक कार्ल आईकॉन ने एप्पल के अपने सभी शेयरों को बेच दिया है. 2003 के बाद पहली बार एप्पल की बिक्री में गिरावट आने के बाद कार्ल आइकॉन ने ये फैसला लिया. सूत्रों के मुताबिक उनके पास एप्पल के 45.8 मिलियन शेयर थे और उन्होंनें करीब 3 साल पहले एप्पल में इतना बड़ा हिस्सा खरीदा था.

अमेरिका में एसएंडपी 500 इंडेक्स में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाला ये शेयर पिछले 5 कारोबारी सत्रों में 11 फीसदी की दर से गिरा और शुक्रवार को भी 1.14 फीसदी की दर से टूटकर 93.75 डॉलर प्रति शेयर पर बंद हुआ.

एप्पल के लिए चीन की तरफ से भी बुरी खबरें आ रही हैं क्योंकि चीन की सरकार एप्पल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. अप्रैल की शुरुआत में ही चीन की सरकार ने पूरे देश में एप्पल की आईट्यून मूवीज सर्विसेज और आईबुक स्टोर्स पर रोक लगाई थी क्योंकि वहां ऑनलाइन पब्लिशिंग के लिए नए नियम आए हैं. लिहाजा मार्च तिमाही में चीन से आना वाला राजस्व 26 फीसदी घट गया है. ये कंपनी के लिए एक झटका है क्योंकि एप्पल चीन को आगामी ग्रोथ के लिए बड़ी संभावना मानकर चल रहा था.
देश में 11 महीनों में रिकार्ड 5100 करोड़ डॉलर विदेशी निवेश आया

देश में 11 महीनों में रिकार्ड 5100 करोड़ डॉलर विदेशी निवेश आया

नई दिल्लीः देश में कारोबारी साल 2015-16 के पहले 11 महीनों में रिकार्ड 51 अरब डॉलर यानी 5100 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश-फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट (एफडीआई) आया है. सरकार ने आज यह जानकारी दी है. डीआईपीपी के सचिव रमेश अभिषेक ने आईपीआर पर आयोजित एक सम्मेलन में कहा, “अप्रैल से फरवरी 2015-16 में देश में रिकार्ड 51 अरब डॉलर से अधिक का एफडीआई आया है, जो अब तक का सर्वाधिक है. इस सम्मेलन का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने किया था.

रमेश अभिषेक ने कहा कि एफडीआई डेटा से पता चलता है कि सरकार ने ऐसा माहौल बनाया है, जिसमें विदेशी निवेशक अपने निवेश को सुरक्षित समझ रहे हैं. आम आदमी और कारोबार की सुविधा के लिए काफी कोशिशें की जा रही हैं. जीवन स्तर बेहतर करने और गरीबी मिटाने के लिए हमें लगभग 30 सालों तक 10 फीसदी की विकास दर चाहिए, लेकिन इसके लिए निवेश और दूसरे मोर्चे पर काफी मेहनत करनी होगी.

देश में रिकार्ड विदेशी निवेश आने का सिलसिला लगातार जारी है. कारोबारी साल 2011-12 में देश में 46.55 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था. वहीं 2014-15 में 44.29 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था. इसके अलावा जनवरी 2016 में 12 महीने के ‘मूविंग एवरेज’ आधार पर देश में आया एफडीआई अब तक के रिकार्ड 3 अरब डॉलर पर पहुंच गया था.

डीआईपीपी सचिव रमेश अभिषेक ने कहा कि देश के एक उचित कारोबारी माहौल के लिए कारोबार सुगमता जरूरी है और सरकार इसको सुधारने के लिए काफी कोशिशें कर रही है.