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सरकार ने भरा खजानाः पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी 80.14% बढ़ी



नई दिल्लीः उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिये पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी घटाने को लेकर सरकार भले ही फिलहाल कोई निर्णय नहीं ले सकी हो. लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों पर इस इनडायरेक्ट टैक्स की वसूली में इजाफे से सरकार का खजाना भरता जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2015-16 में सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) की वसूली से 1,98,793.3 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ जो इसके पिछले साल की तुलना में करीब 80.14 फीसदी अधिक है.
मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह जानकारी हासिल हुई है.
नई दिल्ली स्थित केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ा प्रबंधन निदेशालय की ओर से आरटीआई के तहत गौड़ को एक जून को भेजे गये जवाब में बताया गया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम उत्पादों पर 1,10,354 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी वसूली थी.
इसका साफ मतलब है कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर लगातार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर जनता की जेब में पैसा ना पहुंचाकर अपना खजाना भरने में लगी हुई है. वर्ना अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों के इतने सस्ते होने के बावजूद भी घरेलू दाम कम ना होने के पीछे और क्या कारण हो सकता है ? सरकार एक्साइज ड्यूटी लगातार बढ़ाकर जनता को इसका असली फायदा नहीं पहुंचने दे रही है.
आरटीआई के तहत मिले पिछले 5 सालों के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 के मुकाबले में वित्तीय वर्ष 2015-16 में पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी का राजस्व संग्रह 166.12 फीसदी बढ़ चुका है.
वित्तीय वर्ष 2011.12 में पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी की वसूली से सरकारी खजाने में 74,701 करोड़ रुपये जमा हुए थे. इसके बाद से इस अप्रत्यक्ष कर के राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.